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सुरक्षा परिषद: ‘मानवीय सहायताकर्मियों पर हमलों का अन्त करना होगा’

सुरक्षा परिषद: ‘मानवीय सहायताकर्मियों पर हमलों का अन्त करना होगा’

सशस्त्र टकरावों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा के विषय पर हुई एक चर्चा के दौरान यह अपील की गई. इस बैठक में सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2730 (2024) पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों और मानवीय सहायताकर्मियों की सुरक्षा पर बल दिया गया है.

मानवीय सहायता मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) की सहायक महासचिव जॉयस मसूया और यूएन सुरक्षा व सलामती विभाग (UNDSS) के प्रमुख जिलेस मिशॉड ने अभूतपूर्व संख्या में मानवीय सहायताकर्मियों की मौतों पर चिन्ता जताई.

साल 2024 मानवीय सहायताकर्मियों के लिए सबसे घातक वर्ष साबित हुआ. इस दौरान 20 देशों में 377 मौतें हुईं, जोकि 2023 की तुलना में क़रीब 100 अधिक हैं.

यह एक चिन्ताजनक रुझान को दर्शाता है चूँकि 2023 में 2022 की तुलना में पहले ही 137 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी. अतीत की तुलना में कहीं अधिक संख्या में सहायताकर्मी घायल हो रहे हैं, उन्हें अगवा किया जा रहा है, हमलों में निशाना बनाया जा रहा है, और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने की भी घटनाएँ हुई हैं.

सहायक महासचिव जॉयस मसूया ने बताया कि पिछले दो वर्ष विशेष रूप से क्रूर साबित हुए हैं. सूडान में अप्रैल 2023 में हिंसक टकराव भड़कने के बाद से अब तक, कम से कम 85 मानवीय सहायताकर्मी मारे गए हैं. ये सभी सूडान के नागरिक थे.

ग़ाज़ा, सबसे ख़तरनाक

उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले ही ग़ाज़ा में, OCHA और फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी की टीम ने 15 आपात सहायताकर्मियों के शव बरामद किए हैं, जो कई दिन पहले, जीवनरक्षक सहायता प्रदान करते समय इसराइली बलों की गोलीबारी में मारे गए थे. 

इन मौतों के बाद, ग़ाज़ा में अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक 408 मानवीय सहायताकर्मी मारे जा चुके हैं, और यह मानवतावादियों के काम करने के लिए सबसे ख़तरनाक जगह बन गई है. 

जवाबदेही की अपील

सहायक महासचिव मसूया ने सुरक्षा परिषद से सवाल किया कि सहायताकर्मियों की मौतों को रोकने और न्याय को सुनिश्चित किए जाने के लिए क्या क़दम उठाए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि मानवीय सहायताकर्मियों व यूएन कर्मचारियों की रक्षा के लिए ठोस अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी फ़्रेमवर्क की कमी नहीं है, मगर इसके लिए राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी देखने को मिलती है.

सहायक महासचिव मसूया ने प्रस्ताव 2730 की अहमियत पर बल देते हुए सुरक्षा परिषद से तीन आग्रह किए: 

  • पहला, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के लिए सम्मान सुनिश्चित करने और मानवतावादियों की रक्षा के लिए क़दम उठाना. इसके अन्तर्गत, ज़रूरी होने पर सुरक्षा परिषद सदस्य देशों को यात्रा करनी होगी, तथ्य-खोजी मिशन (fact-finding missions) गठित करने होंगे और ऐसी घटनाओं के ज़िम्मेदार देशों को हथियारों का निर्यात रोकना होगा.

  • दूसरा, यूएन कर्मचारियों व मानवीय सहायताकर्मियों के विरुद्ध हमलों की निन्दा करना. उनके अनुसार, चुप्पी और केवल चुनिन्दा अवसरों पर क्षोभ व्यक्त करने से दोषियों के हौसले मज़बूत होते हैं.

  • तीसरा, जवाबदेही पर बल, जिसमें सुरक्षा परिषद की भूमिका अहम होगी. इसके तहत, घरेलू व अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनी फ़्रेमवर्क को मज़बूती देनी होगी, ताकि अन्तरराष्ट्रीय अपराध मामलों में अदालती कार्रवाई की जा सके.

बढ़ते ख़तरों की चेतावनी

यूएन सुरक्षा व सलामती विभाग (UNDSS) के प्रमुख जिलेस मिशॉड ने सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानवीय सहायताकर्मियों पर हमलों के लिए दंडमुक्ति की भावना, अब एक “नई सामान्य स्थिति” बन गई है, जिसे न केवल ग़ैर-सरकारी तत्वों बल्कि देशों की सरकारों और उनके सहयोगियों द्वारा भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

उन्होंने चेतावनी दी कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानूनी के प्रति व्यापक बेपरवाही के बीच, अनेक सदस्य देशों ने बजट कटौती को थोपा है, जिसके कारण, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को सहायता प्रयासों में कमी लाने के मजबूर होना पड़ रहा है. 

मानवीय सहायता एजेंसियाँ इससे सर्वाधिक प्रभावितों में हैं और इन हालात से असुरक्षा गहरा सकती है.

UNDSS प्रमुख ने कहा कि ग़ाज़ा और अन्य स्थानों पर इसके संकेत दिखाई देने लगे हैं. आम नागरिकों की हताशा का पहला निशाना, मानवीय सहायताकर्मी बन सकते हैं. 

जिलेस मिशॉड ने ज़ोर देकर कहा कि बजट से जुड़े दबावों की वजह से सुरक्षा सम्बन्धी समर्थन के स्तर पर असर पड़ने की आशंका है, मगर, उनके अनुसार, यूएन ज़रूरत के अनुसार बदलाव लाने पर काम करेगा, और मानवतावादी व विकास समुदाय के साथ-साथ सदस्य देशों के लिए एक भरोसेमन्द साझेदार की अपनी भूमिका जारी रखेगा.

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