उद्योग/व्यापार

RIL में बदलाव के आसार कम

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भले ही दिसंबर तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का प्रदर्शन बाजार अनुमानों से बेहतर रहा और इस शेयर का प्रदर्शन कमजोर रहा है, लेकिन अल्पाव​धि कारकों के अभाव को देखते हुए इसमें बड़ी तेजी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। आरआईएल का शेयर पिछले महीने के दौरान 5 प्रतिशत गिरा और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारत के बजाय चीन पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की वजह से इस शेयर का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

न्यूवामा रिसर्च के जल ईरानी के नेतृत्व में विश्लेषकों ने अल्पाव​धि परिदृश्य को देखते हुए कंपनी के लिए अपने वित्त वर्ष 2024 के परिचालन मुनाफा अनुमानों में 2 प्रतिशत तक की कमी की है। ब्रोकरेज का मानना है कि हाई स्पीड से जुड़े डीजल/विमानन ईंधन निर्यात पर विंडफॉल कर का अल्पाव​धि में आय पर दबाव पड़ सकता है। विश्लेषकों ने इस शेयर पर खरीदें रेटिंग दी है और उनका मानना है कि आरआईएल की नई ऊर्जा पेशकश वृद्धि को मजबूती प्रदान कर सकती है।

आईआईएफएल सिक्योरिटीज ने भी दूरसंचार शुल्क दरों में विलंब को ध्यान में रखते हुए अपने वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2023 के आय अनुमानों में 3-4 प्रतिशत तक की कटौती की है। ब्रोकर का मानना है कि इस शेयर पर दूरसंचार में शुल्क वृद्धि से संबं​धित खबरों, जियो फाइनैं​शियल सर्विसेज को अलग किए जाने और ग्रीन एनर्जी व्यवसाय से सकारात्मक ​असर दिखेगा।

जेपी मॉर्गन के पिनाकिन पारेख और सरफराज भीमानी का मानना है कि तेल-रसायन या ओ2सी व्यवसाय कैलेंडर वर्ष 2023 में कंपनी के लिए आय का मुख्य वाहक बना रहेगा, जबकि उपभोक्ता व्यवसाय की वृद्धि कमजोर पड़ी है। ओ2सी व्यवसाय में रिफाइनिंग एवं पेट्रोरसायन और अन्वेषण एवं उत्पादन सेगमेंट शामिल हैं। दिसंबर तिमाही में कंपनी के परिचालन मुनाफा मार्जिन में तिमाही आधार पर ओ2सी व्यवसाय का करीब 50 प्रतिशत योगदान रहा। इस सेगमेंट का परिचालन लाभ मजबूत मिडिल डि​स्टिलेट क्रैक्स (डीजल, विमानन ईंधन) में तिमाही आधार पर सुधार को देखते हुए 16 प्रतिशत तक बढ़ा था।

इस सेगमेंट में डाउनस्ट्रीम रसायन मार्जिन से दबाव पड़ा। डाउनस्ट्रीम रसायन मार्जिन के लिए तेज आपूर्ति के बीच मांग कमजोर बनी रही। कंपनी ने संकेत दिया है कि चीन, यूरोपीय संघ और अमेरिका से मांग सुधरने के साथ पॉलिमर मार्जिन में तेजी आ सकती है। कीमत वृद्धि की वजह से कंपनी के परिचालन लाभ में तेल एवं गैस सेगमेंट से 91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बिक्री में सुधार की वजह से यह रफ्तार बरकरार रहने की संभावना है।

रिलायंस जियो के लिए राजस्व और परिचालन लाभ अनुमानों के मुकाबले कमजोर रहा है। जहां ग्राहक वृद्धि मजबूत बनी रही, लेकिन वहीं प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में सपाट या मामूली वृद्धि से कुल राजस्व पर दबाव पड़ा। ग्राहक आधार में बदलाव लाने और उसे साफ-सुथरा बनाने से एआरपीयू को मोर्चे पर निराशा हाथ लगी और ऊंची कीमत वाले प्लान के लिए अपग्रेडेशन से मामूली मदद मिली। कमजोर एआरपीयू के अलावा, ऊंचे मूल्यह्रास से भी दूरसंचार सेगमेंट का मुनाफा प्रभावित हुआ और यह अनुमानों के अनुरूप नहीं रहा।

कंपनी अपने 5जी नेटवर्क को पेश करने में सक्रियता दिखा रही है, जिसे देखते हुए एआरपीयू के मोर्चे पर और मजबूती 5जी प्लेटफॉर्म पर अमल होने और कीमत वृद्धि के जरिये दर्ज की जा सकती है। कीमत वृद्धि का दूरसंचार खंड के परिचालन और वित्त पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। हालांकि बाजार इसे लेकर अनि​श्चित है या उसे अल्पाव​धि में किसी कीमत वृद्धि का अनुमान नहीं है।

वहीं रिटेल मोर्चे पर, स्टोर खुलने की मजबूत रफ्तार और ग्राहकों की शानदार आवाजाही से शुद्ध लाभ 19 प्रतिशत बढ़ने में सफल रहा। स्टोरों की संख्या 17,225 हो गई, जो एक साल पहले की तिमाही के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले तीन साल में, कंपनी ने अपनी रिटेल उप​स्थिति में करीब डेढ़ गुना तक इजाफा किया है। जहां कई फॉर्मेटों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और लेनदेन 30 प्रतिशत बढ़ गया, वहीं कंपनी ने संकेत दिया है कि ग्राहक धारणा सतर्क बनी हुई है और डि​स्क्रेशनरी खर्च त्योहारी सीजन के बाद कमजोर पड़ा है।

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मजबू​त परिचालन दक्षता से परिचालन मोर्चे पर सुधार लाने में मदद मिली। मार्जिन भी एक साल पहले की तिमाही के मुकाबले 40 आधार अंक तक बढ़कर 7.9 प्रतिशत पर पहुंच गया। राजस्व और मार्जिन की राह भविष्य में बढ़ती बिक्री, उत्पाद मिश्रण पर निर्भर करेगी।

आईसीआईसीआई डायरेक्ट रिसर्च के विश्लेषक भारत छोदा का मानना है कि आरआईएल का उपभोक्ता व्यवसाय भविष्य में कंपनी के लिए वृद्धि का मुख्य वाहक होगा। जहां जियो द्वारा की गई शुल्क वृद्धि पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी, वहीं ओ2सी सेगमेंट में सुधार आने की संभावना है, क्योंकि मजबूत मिडिल डि​स्टिलेट क्रैक्स से सकल रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी। मुख्य व्यवसायों के प्रदर्शन के अलावा, बाजार की नजर कंपनी के कर्ज पर भी लगी रहेगी।

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