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andaman and nicobar islands india china relations, यहां से सेना उड़ा सकती है चीन की नींद, जानें क्यों भारत के लिए वरदान से कम नहीं अंडमान निकोबार द्वीप समूह – andaman and nicobar islands key indian military assets india eye on china movement

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नई दिल्ली: भारतीय सेना के लिए अंडमान निकोबार द्वीप समूह इतना खास क्यों है। आने वाले वक्त में इसकी अहमियत और भी अधिक बढ़ने वाली है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 2001 में पोर्ट ब्लेयर में अंडमान और निकोबार त्रि-सेवा कमांड बनाया हालांकि यह अब तक उस दृष्टिकोण पर वैसा खरा नहीं उतरा है। कल ही सोमवार नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्‍मदिन 23 जनवरी के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन 21 द्वीपों को अब परमवीर चक्र विजेताओं के नाम से जाना जाएगा। इस अवसर पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर करने का ऐलान हुआ। रक्षा एक्सपर्ट का मानना है कि प्रधानमंत्री का फैसला भारतीय सेना के मनोबल को बढ़ाने वाला है। यह एक अलग लेवल पर ले जाने वाला है साथ ही रणनीतिक तौर पर भारतीय सेना को हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।

अब सही ट्रैक पर आगे बढ़ने की तैयारी

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा किया और नेताजी को उनकी 126वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कैंपबेल बे, वायु सेना स्टेशन कार्निक और इंदिरा पॉइंट का भी दौरा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन भारतीय सेना के तीनों अंगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले पूरे विश्व में किसी भी अन्य देश ने राष्ट्र के लिए लड़ने वाले जवानों के नाम पर द्वीपों का नाम रखकर उनकी वीरता को सम्मानित करने का कदम नहीं उठाया है। अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार द्वीप श्रृंखला को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पूरे क्षेत्र को रणनीतिक सैन्य संपत्ति बनाने की आवश्यकता है। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा बनाई गई त्रि-सेवा अंडमान और निकोबार कमांड को उस विजन पर खरा उतरना चाहिए जिसके लिए इसे पहली बार बनाया गया था।

चीन के लिहाज से काफी अहम


अंडमान निकोबार द्वीप समूह मलक्का स्ट्रेट और दस डिग्री चैनल के मुहाने पर स्थित है। मलक्का स्ट्रेट से ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी सिरा इंडोनेशिया के बांदा आचेह से मात्र 237 किलोमीटर की दूरी पर है। दक्षिण चीन सागर में प्रवेश करने के दो मार्ग हैं और भारत के लिए यह काफी अहम है। यह द्वीप समूह रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है। चीन के मद्देनजर भी यह यह काफी महत्वपूर्ण है। भारत ने चीन के साथ पड़ोसी देशों की समुद्री और जमीनी सीमाओं से लगते देशों के साथ संबंधों को बढ़ाने का काम किया है। इन द्वीपसमूहों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के लिए भारत अन्य देशों से सहयोग लेकर भी आगे बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, जापान-अमेरिका फिशहुक या साउंड सर्वेलांस सिस्टम, जो पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए तैयार किए गए सेंसर्स की सीरीज है। चीन को कूटनीतिक तौर पर घेरने के लिए नेकलेस ऑफ डायमंड्स स्ट्रैटजी पर भारत लगातार काम कर रहा है। इस द्वीप समूह के जरिए भारत अपनी रणनीति को और अधिक धार दे सकता है।

चीन की हर चाल पर नजर, करना होगा ये काम

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह दक्षिण पूर्व एशिया यानी आसियान देशों के करीब स्थित है, जो भारत की हिंद-प्रशांत दृष्टि के केंद्र में हैं। यदि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती का सामना करने की योजना बना रहा है तो उसे जेटी का निर्माण करना होगा। एक सैन्य संपत्ति होने के अलावा, द्वीप समूह पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है। सरकार का इस ओर भी ध्यान है हालांकि इसके लिए द्वीपों की अपनी बिजली यूनिट होनी चाहिए और डीजल जनरेटर पर निर्भर नहीं होना चाहिए। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का विकास बढ़ते हुए भारत के कदमों से मेल खाना चाहिए क्योंकि यह न केवल भारतीय उपमहाद्वीप को बल्कि दुनिया भर में एक अलग संदेश देगा।

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