पर्यावरण

सूखाग्रस्त कैबो वर्डे में, टिकाऊ मरूद्वीप के लिये, उम्मीद की किरण

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यूएन महासचिव की कार, कई घंटों तक एक बल खाती सड़क पर दौड़ती रही, जो एक वृहद सूखे मैदान से गुज़रती है, मगर एक अन्तिम मोड़, कुछ सौ फ़ीट की चढ़ाई, और फिर उनकी कार की खिड़की से नज़र आते हैं, हरियाली के विभिन्न रंग और झरोखे, पत्थरों की दीवारों के सहारे छोटे-छोटे गलियारे जो केले के पेड़ों, ताड़ और गन्ने के पौधों से भरे हैं, और कुछ दूर पर नज़र देखती है – चांदी के रंग जैसे चमकते हुए जल झरने.

ये हरी-भरी पॉल घाटी, पर्वतीय द्वीप सैंटो ऐंटाओ में स्थित है, जोकि कैबो वर्डे का सुदूर पश्चिमी द्वीप है, और ये इस द्वीपीय देश में एक मरूद्वीप का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ की केवल 10 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है. उस छोटी सी कृषि योग्य भूमि का भी लगभग 18 प्रतिशत क्षेत्र, वर्ष 2000 से 2020 के दरम्यान ख़त्म हो गया.

यूएन प्रमुख ने कैबो वर्डे की यात्रा का दूसरे दिन रविवार को, एक गलियारे का दौरा किया जहाँ उनका स्वागत किसानों के एक समूह ने किया. उन किसानों के साथ मौजूद, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की एक विशेषज्ञ कात्या नेवेस ने बताया कि वो एक प्रायोगिक बाग़ीचे के मध्य में हैं, जहाँ पुरुष और महिलाएँ, नई वनस्पति प्रजातियाँ आज़मा रहे हैं और टिकाऊ तकनीकों के बारे में सीख रहे हैं.

कैबो वर्डे में, सैंटो ऐंटाओ, एक बहुत हरित और सर्वाधिक पहाड़ी क्षेत्र वाला द्वीप है.

यूएन महासचिव ने इन किसानों को पुर्तगाली भाषा में बधाई दी और एक रंगीन मेज़ की तरफ़ इशारा किया, जिस पर कॉफ़ी बीन्स, बन्द गोभी, टमाटर, रतालू, कसावा सहित कुछ अन्य उत्पाद रखे हुए थे. एक ऐसे देश में ये स्थानीय स्तर पर उगाए गए उत्पाद, वास्तव में एक दुर्लभ वस्तु हैं जिसे अपनी आबादी के लिए, उसकी खाद्य ज़रूरतों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा आयात करना पड़ता है.

यूएन प्रमुख को बताया गया कि इस बाग़ीचे में कसावा की जो कुछ नई प्रजातियाँ उगाई जा रही हैं, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि वो सूखा की स्थिति का सामना करने में ज़्यादा सहनशील होंगी. इस देश को पिछले पाँच वर्षों से सूखे ने प्रभावित किया हुआ है.

ये भी बताया गया कि किसानों ने किस तरह अपनी ज़मीनों की सिंचाई करने और उनमें खाद व उर्वरक प्रयोग करने के नए तरीक़ों के बारे में सीखा है.

इस कार्यक्रम से 285 किसानों को लाभ पहुँचा है और ये संयुक्त राष्ट्र व उसके साझीदार संगठनों के नेतृत्व में चलाए जा रहे अनेक कार्यक्रमों और परियोजनाओं का ही एक हिस्सा है.

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की सहायक प्रतिनिधि, कात्या नेवेस, कैबो वर्डे में जलवायु परिवर्तन सहनशील परियोजनाओं में मदद कर रही हैं.

इनसे देश में कृषि का रूप बदलने की आशा है, जिससे और ज़्यादा लोगों की खाद्य ज़रूरतें पूरी की जा सकेंगी और कुल मिलाकर पृथ्वी के लिए ज़्यादा टिकाऊ विकल्प होंगे.

सूखे के बीच जल प्रबन्धन

‘Gota a gota’ एक ऐसी ही पहल है जिसने सैकड़ों किसानों के लिए बून्द सिंचाई प्रणाली को आसान बनाया है.

FAO की सहायक प्रतिनिधि कात्या नेवेस ने बताया कि 10 द्वीपों में फैली केवल तीन हज़ार हैक्टेयर भूमि तक ही सिंचाई पहुँच पाती है, मगर अध्ययनों से मालूम होता है कि ये क्षेत्र पाँच हज़ार हैक्टेयर तक पहुँच सकता है.

पास में ही रहने वाली ऐंजेला सिल्वा ने भी यूएन महासचिव से मुलाक़ात की. वो भी लाभान्वितों में से एक हैं और उन्हें बून्द सिंचाई प्रणाली के जल्द ही स्थापित हो जाने की आशा है.

ऐंजेला सिल्वा कहती हैं, “मैं किसानों के एक परिवार में पैदा हुई, मेरे माता-पिता, मेरे पूर्वज सभी किसान थे. और पति से मेरा अलगाव होने तक, मेरे पति ने ही भूमि का ख़याल रखा था.”

इस पूर्णालिक अध्यापिका ने दो वर्ष पहले, उस भूमि पर काम करने का निर्णय लिया जो उन्हें विरासत में मिली.

वो कहती हैं, “मैं अब भी सीख रही हूँ, मगर मैं और ज़्यादा सीखना चाहती हूँ और इस कामकाज को, आय अर्जित करने के एक तरीक़े में तब्दील करना चाहती हूँ.”

कैबो वर्डे में संयुक्त राष्ट्र समर्थित परियोजनाओं में, बून्द सिंचाई तकनीक की उपलब्धता भी शामिल है. देश में अनेक वर्षों से सूखे का प्रभाव रहा है.

उनकी ज़्यादातर ज़मीन में गन्ने का उत्पादन होता है, जिसे आमतौर पर ज़्यादा फ़ायदेमन्द या टिकाऊ फ़सल नहीं माना जाता है, इसलिए उन्होंने गन्ने की फ़सल के बजाय, केला और पपीते के पेड़ों के साथ-साथ, अन्य वनस्पतियों की प्रजातियाँ भी लगाईं. इसके बारे में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीखा.

उन्हें आशा है कि वो नई सिंचाई प्रणाली की मदद से, सूखे के कुछ प्रभावों को टालने में कामयाब हो सकेंगी और औसतन पानी का बेहतर प्रयोग कर सकेंगी.

अध्ययन दिखाते हैं कि कैबो वर्डे में बारिश होती भी है तो लगभग 20 प्रतिशत पानी सतह से ही बह जाता है, 13 प्रतिशत जज़्ब होता है और 67 प्रतिशत भाप बनकर उड़ जाता है.

यही चुनौती एक युवा स्थानीय किसान डेयरसन डा क्रूज़ डुआर्टे के सामने भी है, जिन्होंने महासचिव को आश्चर्यचकित कर देने वाली एक कॉफ़ी पेश की, क्योंकि वो नहीं जानते थे कि इस द्वीप में कॉफ़ी का उत्पादन भी होता है.

इस युवा किसान ने रतालुओं से भरी एक नदिका के निकट, घाटी की तलहटी से इशारा करते हुए बताया कि कुछ ऊँचाई पर स्थित सैंटा इसाबेल में फलियों का उत्पादन होता है. ये सर्वाधिक ऊँचाई वाले एक पहाड़ के शीर्ष पर स्थित है, जहाँ ऐसा लगता है कि ज़मीन की हरियाली, नीले आसमान से मिलती है.

100 व्यक्तियों वाले इस क़स्बे तक केवल पैदल ही पहुँचा जा सकता है और यहाँ की पूरी खेतीबाड़ी, बारिश पर निर्भर है. इसलिए पिछले पाँच वर्ष के सूखे ने, यहाँ की आबादी के लिए बहुत कठिन बना दिए हैं.

जब बारिश ख़त्म हुई तो, सबसे पहले युवजन ने यहाँ से प्रस्थान किया.

ये किसान कहता है, “मेरा ख़याल है कि अब वहाँ दस लोग भी नहीं रहते हैं. बाक़ी सभी लोग, अन्य स्थानों के लिये प्रस्थान कर गए हैं, क्योंकि यहाँ कोई कामकाज नहीं, यहाँ बारिश नहीं है और यहाँ सूखा पड़ा हुआ है. कुछ ऐसे भी मामले हैं कि अगर किसी के पास मवेशी हैं तो उनका पेट भरने के लिए पर्याप्त चारा नहीं है. कोई अन्य आजीविका स्रोत नहीं है, इसलिए वो लोग एक बेहतर जीवन की तलाश में, यहाँ से चले गए.”

खाद्य असुरक्षा में उछाल

कैबो वर्डे में, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की एक जलवायु सहनशील परियोनजा का दृश्य.

अनेक वर्षों के सूखे के बाद, वर्ष 2021-2022 के कृषि मौसम में, उत्पादन शून्य रहा. इस समय तक जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध के परिणामों ने, लघु द्वीपीय देशों के लिए, एक वृहद तूफ़ान खड़ा कर दिया, और कैबो वर्डे की सरकार को एक कठिन निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ा.

जून 2022 में, कार्यकारी अधिकारियों ने एक सामाजिक व आर्थिक राष्ट्रीय आपदा की घोषणा कर दी.

इस देश को हाल के समय तक, सब सहारा क्षेत्र के देशों में, निर्धनता में कमी लाने के प्रयासों में चैम्पियन समझा जा सकता था. विश्व बैंक के अनुमान दिखाते हैं कि वर्ष 2015 से 2019 के दौरान, निर्धनता दर में छह प्रतिशत अंक की कमी हुई जोकि 41 प्रतिशत से कम होकर 35 प्रतिशत पर आई.

मगर जून 2022 तक, संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के आँकड़ों के अनुसार, खाद्य असुरक्षा से प्रभावित लोगों की संख्या में तेज़ी से उछाल आया. कैबो वर्डे की कुल आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा – 46 हज़ार से अधिक महिलाएँ, पुरुष और बच्चे, जून और अगस्त 2022 के दरम्यान खाद्य असुरक्षा के अत्यन्त गम्भीर स्तर का सामना कर रहे थे.

इससे देश में हाल के वर्षों में बहुत कठिनाई से अर्जित विकास लाभों के लिए जोखिम उत्पन्न हो गए हैं.

कैबो वर्डे ने वर्ष 2026 तक अत्यन्त गम्भीर निर्धनता का उन्मूलन करने का संकल्प किया हुआ है, और शनिवार को देश के प्रधानमंत्री ने यूएन महासचिव को आश्वासन दिया कि उनका देश अब भी इस लक्ष्य पर टिका हुआ है. मगर प्रधानमंत्री ने ये भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों ने इस लक्ष्य प्राप्ति को कहीं ज़्यादा कठिन बना दिया है.

FAO की विशेषज्ञ कात्या नेवेस ने यूएन न्यूज़ से कहा कि पिछले कुछ वर्षों के संकटों ने, संयुक्त राष्ट्र और इसकी एजेंसियों के प्रयासों की महत्ता को और ज़्यादा अहम बना दिया है. “हम इन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, और हम ऐसा, खेतीबाड़ी के तरीक़े में बदलाव लाकर कर सकते हैं.”

कैबो वर्डे के सैंटो ऐंटाओ नामक द्वीप में, संयुक्त राष्ट्र की एक जलवायु सहनशील परियोजना में, काम करते हुए दो किसान.

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