विश्व

वर्ष 2023 में आर्थिक वृद्धि दर 1.9 प्रतिशत रह जाने की आशंका

Share If you like it

आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के यूएन विभाग (UNDESA) ने बुधवार को ‘विश्व आर्थिक हालात व सम्भावनाएँ‘ नामक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार यह हाल के दशकों में आर्थिक वृद्धि की सबसे कम दरों में से है.

इससे पहले, ऐसी परिस्थितियाँ 2007-08 में वित्तीय संकट और फिर कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाई दी थी.

आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग ने यह रिपोर्ट, वैश्विक महामारीक, यूक्रेन युद्ध और उससे उपजे खाद्य व ऊर्जा संकटों, बढ़ती मुद्रास्फीति, क़र्ज़ के दबाव और जलवायु आपात स्थिति की पृष्ठभूमि में जारी की है.

रिपोर्ट बताती है कि नज़दीकी अवधि में आर्थिक परिदृश्य निराशाजनक व अनिश्चित है. इन हालात में वैश्विक वृद्धि पूर्वानुमान के अनुसार, इसमें वर्ष 2024 में मामूली सुधार देखने को मिल सकता है और वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत तक पहुँच सकती है.

मगर, यह अन्य अनेक पहलुओं पर निर्भर करता है, जैसेकि मौद्रिक उपाय, ब्याज़ दर, यूक्रेन में युद्ध के परिणाम और आपूर्ति श्रृंखला में फिर से व्यवधान आने की आशंका.

मज़बूत राजकोषीय उपायों की दरकार

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इन निष्कर्षों से, टिकाऊ विकास एजेंडा के 17 लक्ष्यों के लिए, ख़तरा उपजता दिख रहा है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि यह अल्प-अवधि के लिए सोचने, या जल्दबाज़ी में राजकोषीय मितव्ययिता अपनाने का नहीं है, जिससे विषमता गहराए, पीड़ा बढ़े और टिकाऊ विकास लक्ष्य पटरी से उतर जाएँ.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा कि इस अभूतपूर्व समय में अभूतपूर्व कार्रवाई की आवश्यकता होगी.

“इन उपायों में एक रूपान्तरकारी एसडीजी प्रोत्साहन पैकेज भी है, जिसे सभी हितधारकों के सामूहिक व समन्वित प्रयासों से सम्भव बनाया जाए.”

निराशाजनक आर्थिक तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष विकसित और विकासशील, दोनों जगत पर मन्दी की आशंका मंडरा रही है.

वर्ष 2022 में अमेरिका, योरोपीय संघ और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक प्रगति की रफ़्तार काफ़ी हद तक कमज़ोर हुई है.

इससे शेष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विविध प्रकार से नकारात्मक असर पड़ा है.

वैश्विक वित्तीय हालात की सख़्त होती स्थिति और डॉलर में मज़बूती के कारण, विकासशील देशों के लिए राजकोषीय और क़र्ज़ सम्बन्धी समस्या गहरी हुई है.

विश्लेषण के अनुसार, विश्व भर में 85 प्रतिशत से अधिक केन्द्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति को सख़्त बनाया है और 2021 के उत्तरार्ध से उत्तरोत्तर अपनी ब्याज़ दरें बढ़ाई हैं, ताकि मुद्रास्फीति दबाव पर नियंत्रण पाना और मन्दी से बचना सम्भव हो सके.

वैश्विक मुद्रास्फीति वर्ष 2022 में 9 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई, जोकि अनेक दशकों में सबसे ऊँचा स्तर है. अब इसमें कमी आने की सम्भावना है, लेकिन यह 2023 में 6.5 प्रतिशत तक बनी रह सकती है.

धीमी आर्थिक वृद्धि, ऊँची मुद्रास्फीति और कर्ज़ के बढ़ते दबाव के कारण टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर जोखिम मंडरा रहा है.

धीमी आर्थिक वृद्धि, ऊँची मुद्रास्फीति और कर्ज़ के बढ़ते दबाव के कारण टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर जोखिम मंडरा रहा है.

बेरोज़गारी, निर्धनता की चुनौती

रिपोर्ट बताती है कि अनेक विकासशील देशों में वर्ष 2022 में अपेक्षाकृत धीमी रोज़गार बहाली देखने को मिली, और वहाँ अब भी बेरोज़गारी का ऊँचा स्तर है.

वैश्विक महामारी के शुरुआती चरण में महिलाओं के रोज़गार अवसरों पर विषमतापूर्ण असर पड़ा और अभी हालात को पूरी तरह से पलटा नहीं जा सका है.

यूएन विशेषज्ञों के अनुसार, हालात में बेहतरी मुख्यत: अनौपचारिक सैक्टर से ही नज़र आई है.

धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई का ऊँचा स्तर और बढ़ता क़र्ज, ये कुछ ऐसी चुनौतियाँ हैं, जिनसे टिकाऊ विकास की दिशा में कठिनाई से दर्ज की गई प्रगति पर पानी फिर जाने का जोखिम है.

बढ़ती आवश्यकताएँ

आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग ने बताया कि वर्ष 2022 में, अचानक खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे लोगों की संख्या, 2019 की तुलना में दोगुनी होकर, 35 करोड़ पर पहुँच गई.

लम्बे समय से आर्थिक सुस्ती और आय वृद्धि की धीमी गति से ना केवल निर्धनता उन्मूलन प्रयासों को झटका लगा है, बल्कि देशों की टिकाऊ विकास लक्ष्यों में निवेश करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है.

यूएन विभाग के अवर महासचिव ली जुनहुआ ने कहा कि मानव पीड़ा को टालने और सर्वजन के लिए एक समावेशी व सतत भविष्य को समर्थन देने हेतु, वैश्विक समुदाय को साझा प्रयास करने होंगे.

अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर बल

रिपोर्ट में देशों की सरकारों से राजकोषीय मितव्ययिता से बचने का आग्रह किया गया है, जिससे आर्थिक वृद्धि के रास्ते में अवरोध पैदा होंगे, और सर्वाधिक निर्बल समुदाय विषमतापूर्ण ढंग से प्रभावित होंगे.

इन हालात में अगली कई पीढ़ियों तक लैंगिक समानता और विकास सम्भावनाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है.

रिपोर्ट में सार्वजनिक व्यय नीति को फिर से प्राथमिकता दिए जाने का आग्रह किया गया है, ताकि रोज़गार सृजन और आर्थिक वृद्धि में नई स्फूर्ति भरने के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया जा सके.

इस क्रम में, सामाजिक संरक्षा प्रणालियों को मज़बूत करने, लक्षित व अस्थाई अनुदान के सहारे निरन्तर समर्थन सुनिश्चित करने, नक़दी हस्तान्तरण और बिल पर छूट देने के उपाय सुझाए गए हैं.

इन्हें उपभोग कर में कटौती और कस्टम ड्यूटी में कमी लाकर आगे लागू किया जा सकता है.

यह रिपोर्ट विश्व आर्थिक पूर्वानुमान मॉडल पर आधारित अनुमानों की मदद से तैयार की गई है.

यह रिपोर्ट विश्व आर्थिक पूर्वानुमान मॉडल पर आधारित अनुमानों की मदद से तैयार की गई है.

आम लोगों में निवेश

रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल बुनियादी ढाँचे, नई टैक्नॉलॉजी और जलवायु परिवर्तन शमन व अनुकूलन प्रयासों में रणनैतिक सार्वजनिक निवेश पर बल दिया गया है.

बताया गया है कि इससे सामाजिक लाभ प्राप्त होंगे, उत्पादकता दर में तेज़ी आएगी और आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय झटकों के प्रति सहनक्षमता मज़बूत होगी.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि विकासशील देशों में टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए प्रति वर्ष हज़ारों अरब डॉलर अतिरिक्त वित्त पोषण की आवश्यकता हो सकती है.

इसके मद्देनज़र, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तत्काल मज़बूत संकल्प जताए जाने की अहमियत को रेखांकित किया गया है, ताकि आपात वित्तीय सहायता के लिए सुलभता में विस्तार किया जा सके, विकासशील देशों पर क़र्ज़ के दबाव को घटाया जाए, और एसडीजी वित्त पोषण का दायरा बढ़ाया जाए.

Source link

Most Popular

To Top

Subscribe us for more latest News

%d bloggers like this: