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लीबिया: प्रवासियों के लिए विकट स्थिति – दंडमुक्ति का दंश, जवाबदेही का अभाव

मानवाधिकार मामलों के लिए यूएन प्रमुख ने जिनीवा स्थित परिषद में सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए कहा कि लीबिया में सामूहिक रूप से देश निकाला दिए जाने, बच्चों समेत व्यक्तियों को बेच दिए जाने की घटनाएँ बड़े पैमाने पर हो रही हैं.

इस सिलसिले में सरकारी प्रशासन और ग़ैर सरकारी तत्वों के बीच मिलीभगत होने के भी आरोप हैं और भुक्तभोगियों का अमानवीयकरण किया जा रहा है.

“तस्करी, यातना, जबरन मज़दूरी, उगाही, हिरासत में असहनीय परिस्थितियों में भुखमरी” को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा रहा है, दंडमुक्ति की भावना के साथ.

यूएन उच्चायुक्त टर्क ने लीबियाई प्रशासन से पुकार लगाई है कि निर्बल हालात से जूझ रहे हज़ारों लोगों के विरुद्ध अंजाम दिए गए अपराधों की जाँच की जानी होगी. इस क्रम में, उन्होंने मार्च में दक्षिण-पश्चिमी लीबिया में एक क़ब्र में 65 शव बरामद होने का उल्लेख किया, जिनके प्रवासी होने की आशंका थी.

वोल्कर टर्क ने बताया कि लीबिया-ट्यूनीशिया की सीमा पर एक रेगिस्तानी इलाक़े में एक और सामूहिक क़ब्र मिलने की रिपोर्ट पर जानकारी जुटाई जा रही है. “मृतकों के प्रियजन को सच जानने का हर मायने में अधिकार है.”

अशान्ति भरे हालात

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि योरोपीय संघ और लीबियाई प्रशासन के बीच लम्बे समय से जारी समझौते की समीक्षा की जानी होगी. इसके तहत, भूमध्यसागर के ज़रिये योरोप तक पहुँचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों का पता लगाने और पकड़ने की ज़िम्मेदारी लीबियाई एजेंसियों की है.

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों और तलाश एवं बचाव कार्य में जुटे परोपकारी संगठनों ने अनेक बार इस समझौते की आलोचना की है.

उन्होंने लीबियाई तट रक्षक दल के लापरवाही भरे बर्ताव का हवाला दिया, जिसमें प्रवासियों से भरी नौका पर गोलियाँ चलाए जाने और उन्हें डुबोने के लिए अपने जहाज़ से टकराने के आरोप लगे हैं. ऐसी घटना में जीवित बच गए व्यक्तियों को फिर लीबिया भेज दिया गया.

अप्रैल 2023 के बाद से अब तक पिछले 12 महीनों के दौरान, 2,400 से अधिक लोगों की केन्द्रीय भूमध्यसागर पार करने की कोशिश में या तो जान गई है या फिर वे लापता हैं.

इनमें से 1,300 से अधिक लोगों ने यह सफ़र लीबिया से शुरू किया था.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह अक्षम्य है कि सुरक्षा व गरिमा की तलाश कर रहे लोग पीड़ा में हैं और ऐसे बयाँ ना किए जा सकने वाले हालात में अपनी जान गँवा रहे हैं.

“मैं सभी देशों को अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत समुद्री मार्ग पर ज़िन्दगियाँ बचाने और मौतों की रोकथाम करने के लिए उनके सामूहिक दायित्व को ध्यान दिलाता हूँ.”

सहारा क्षेत्र में जोखिम

उच्चायुक्त टर्क ने सहारा रेगिस्तान से होकर लीबिया जाने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों की इतनी बड़ी संख्या में मौतें होने पर भी चिन्ता जताई और इन्हें टालने के लिए क़दम उठाने की बात कही.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान व्यक्त किए थे कि रेगिस्तान भरा रास्ता पार करने की कोशिश में अपनी जान गँवाने वाले प्रवासियों की संख्या, भूमध्यसागर के मार्ग में होने वाली मौतों की तुलना में दोगुनी होने की आशंका है.

इस अध्ययन के अनुसार, सहारा मरुस्थल को पार करने की कोशिश वाले लोगों की संख्या बढ़ रह है, जिसकी वजह सहेल क्षेत्र और सूडान में हिंसक टकराव, जलवायु व्यवधान और पूर्वी व हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका क्षेत्र में लम्बे समय से जारी आपात परिस्थितियाँ हैं.

इस पृष्ठभूमि में, लीबिया में प्रवासियों व शरणार्थियों के लिए ख़तरे बढ़े हैं, एक ऐसे समय में जब वर्ष 2011 में पूर्व राष्ट्रपति मुआम्मर ग़द्द़ाफ़ी को सत्ता से अपदस्थ किए जाने के बाद से पनपी राजनैतिक अस्थिरता और टकराव के कारण देश विभाजित है.

सम्वेदनशील सुरक्षा हालात के कारण, यूएन मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं के लिए भी, लीबिया में दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में पहुँच पाना कठिन है. उन्हें हिरासत केन्द्रों और देश में अन्य स्थलों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई.

न्यायेतर हत्याएँ

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने चिन्ता जताई कि लीबिया में मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लिए जाने, गिरफ़्तार किए जाने, जबरन गुमशुदगी और हिरासत में मानवाधिकार हनन के मामले बढ़ रहे हैं. साथ ही, विपक्षी नेताओं और विरोध में स्वर मुखर करन वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है और गिरफ़्तारियाँ जारी हैं. अब तक, लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने के कम से कम 60 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि वो कथित रूप से अपने राजनैतिक विचारों को शान्तिपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त कर रहे थे.

वोल्कर टर्क ने कहा कि कुछ मामलों में, हिरासत के बाद न्यायेतर हत्याओं को भी अंजाम दिया गया.  वर्ष 2011 के दौरान अंजाम दिए गए मानवाधिकार हनन और दुर्व्यवहार मामलों पर जवाबदेही का अभाव है, और यह पारस्परिक मेलमिलाप की राह में एक गम्भीर अवरोध है.

क़रीब एक वर्ष पहले लीबिया में ‘डेनियल’ तूफ़ान के कारण तटीय शहर डेरना में विनाशकारी बाढ़ में हज़ारों लोगों की जान गई थी. मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि देश अब भी गहरी असुरक्षा में फँसा है, जबकि आम लीबियाई नागरिक कठोर आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हालात में सुधार लाना अब भी सम्भव है, जिसके लिए अधिकार-आधारित, व्यक्ति-केन्द्रित, संक्रमणकालीन न्याय, टिकाऊ राजनैतिक समाधान, आपसी मेलमिलाप प्रक्रिया, और क़ानून के राज को फिर से बहाल किए जाने की ज़रूरत होगी.

उन्होंने कहा कि एकीकृत, जायज़ संस्थाओं के ज़रिये मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के प्रति जवाबदेही तय की जानी होगी.

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