विश्व

ग़ाज़ा की आबादी निरन्तर हमलों सहित अनेक घातक मुश्किलों की चपेट में

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसियों ने मंगलवार को इन हालात के बारे में आगाह किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इसराइली बमबारी जारी रहने के बीच, 34 लोग, कुपोषण और निर्जलीकरण यानि शरीर में पानी व अन्य तरल पदार्थों की कमी के कारण मौत के मुँह में जा चुके हैं.

WHO के प्रवक्ता ने कहा, “ग़ाज़ा के उत्तरी इलाक़े में केवल कमाल अदवान अस्पताल में ही, पिछले सप्ताह अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के 60 मामले सामने आए थे.”

बीमारियों के आसान शिकार

प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने कहा, “कुपोषण निश्चित रूप से एक ऐसा कारक है, जो शरीर में रोगों का मुक़ाबला करने की क्षमता को कमज़ोर करता है, विशेष रूप से पहले से कमज़ोर स्वास्थ्य वाले लोगों में, जिनमें वृद्धजन और बच्चे प्रमुख रूप से शामिल हैं.”

“कुपोषण की चपेट में आने वाली आबादी बीमारियों का मुक़ाबला नहीं कर सकती है और उन्हें किसी भी तरह का संक्रमण आसानी से लग सकता है.”

उन्होंने इस स्थिति को, पर्याप्त मात्रा में भोजन, स्वच्छ पानी, स्वच्छ साफ़-सफ़ाई और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं होने का एक ऐसा दुष्चक्र क़रार दिया जिसने इस आबादी को जकड़ रखा है.

प्रवक्ता ने बताया कि ग़ाज़ा में स्थित 36 अस्पतालों से केवल 13 अस्पताल ही, आंशिक रूप से काम कर पा रहे हैं.

एक स्वास्थ्य केन्द्र फिर खुला

इस बीच एक अच्छी ख़बर ये है कि ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस इलाक़े में एक यूएन स्वास्थ्य केन्द्र फिर से खुल गया है, जहाँ सैकड़ों लोग स्वास्थ्य मदद के लिए पहुँचे हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA ने बताया है कि यह स्वास्थ्य केन्द्र लगभग छह महीने पहले भीषण युद्ध के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उसे बन्द करना पड़ा था.

ख़ान यूनिस में UNRWA द्वारा समर्थित इस जापानी स्वास्थ्य केन्द्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराई जाती हैं और यहाँ एक दवाख़ाना भी मौजूद है व चिकित्सा कर्मी भी मौजूद रहते हैं, जो पहले युद्ध और सड़कों पर इसराइली टैंकों की भीषण मौजूदगी के कारण, इस स्थान को छोड़कर चले गए थे.

UNRWA की वरिष्ठ संचार अधिकारी लुइस वॉटरिज ने यूएन न्यूज़ को बताया है, “ग़ाज़ा में लोगों को स्वास्थ्य देखभार की सख़्त ज़रूरत है, मगर जारी युद्धक गतिविधियों और UNRWA के स्थलों को भारी नुक़सान के कारण, इस एजेंसी के कुछ गिने-चुने स्वास्थ्य केन्द्र भी काम कर पा रहे हैं.”

उन्होंने बताया, “हमारे एक तिहाई से भी कम स्वास्थ्य केन्द्र काम कर पा रहे हैं.”

मानसिक स्वास्थ्य सहायता

UNRWA ने ग़ाज़ा के मध्य और ख़ान यूनिस इलाक़ों में, 26 जून को मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता सेवाएँ मुहैया कराई थीं.

UNRWA की टीमों ने स्वास्थ्य केन्द्रों में 626 मामलों को देखा जिनमें जागरूकता सत्र चलाने के साथ-साथ लिंग-आधारित हिंसा के मामलों में भी सहायता मुहैया कराई.

संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने जच्चा-बच्चा के 391 मामलों में और उच्च जोखिम का सामना करने वाली गर्भवती महिलाओं को भी चिकित्सा देखभाल मुहैया कराई.

बेदख़ली आदेशों की निन्दा

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी – WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने ज़ोर देकर कहा है, “ग़ाज़ा में दरअसल कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है.”

उन्होंने एक ऑनलाइन सन्देश में आगाह किया है कि ग़ाज़ा सिटी में इसराइल द्वारा हाल ही में जारी किए गए बेदख़ली आदेशों के कारण, जीवनरक्षक देखभाल मुहैया कराने में बाधा आएगी, जबकि ये देखभाल पहले से ही बहुत सीमित है.

WHO प्रमुख ने कहा, “अल अहली और पेशेंट फ़्रैंडली अस्पतालों में सेवाएँ बन्द हो गई हैं, मरीज़ या तो ख़ुद वहाँ से निकलकर चले गए या उन्हें समय से पहले ही वहाँ से भेज दिया, या फिर कमाल अदवान और इंडोनेशियाई अस्पतालों में भेज दिया गया. जबकि इन अस्पतालो में भी ईंधन, बिस्तरों और आपात सेवा सामग्री की भारी क़िल्लत है.”

कोई भी स्थान और व्यक्ति सुरक्षित नहीं

WHO के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने बताया कि इसराइली सेना की निरन्तर भीषण बमबारी और गोलाबारी जारी रहने के नतीजों से भी परे, “ग़ाज़ा हर एक व्यक्ति” बीमार पड़ने और स्वास्थ्य देखभाल नहीं मिलने के कारण मौत के मुँह में चले जाने के जोखिम की चपेट में है.

उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी सोमवार और मंगलवार की रात को भी जारी रही.

ख़ासतौर से गर्भवती महिलाओं, कैंसर या डायबटीज़ के मरीज़ों, युद्ध में घायल हुए लोग जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सता है और जलजनित बीमारियों की चपेट में आने वाले बच्चों के लिए स्थिति बहुत गम्भीर है.

प्रवक्ता तारिक ने स्वास्थ्य एजेंसी की ये अपील फिर दोहराई कि ग़ाज़ा में रास्ते खोलने वाली सभी सीमा चौकियों को खोल दिया जाए, ताकि आपात चिकित्सा की ज़रूरत वाले मरीज़ों को दीगर इलाज मुहैया कराया जा सका.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “दस हज़ार से भी अधिक लोगों को, ग़ाज़ा से बाहर जाकर विशेषीकृत उपचार की ज़रूरत है.”

चिकित्सा सामान की आपूर्ति भी ठहरी हुई है और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि बीते सप्ताह उसका एक भी ट्रक, ग़ाज़ा में दाख़िल नहीं हो सका है.

ग़ाज़ा पट्टी में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा हालत के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा, “अस्पतालों को बमबारी के कारण ख़ाली करना पड़ रहा और वो तबाह हो रहे हैं, और जबतक युद्ध नहीं रुकता है, इन अस्पतालों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की सम्भावना भी नज़र नहीं आती है.”

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