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खाद्य पदार्थों में ‘ज़हरीले रसायन’ ट्रांस फ़ैट के पूर्ण उन्मूलन पर बल

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ट्रांस फ़ैट या ट्रांस फ़ैटी ऐसिड, आहार में वसा का सबसे ख़राब प्रकार माना जाता है, जिसके अधिक सेवन से हृदय रोग का जोखिम बढ़ता है.

ये वसा का प्रकार है जिसे औद्योगिक स्तर पर तरल वनस्पति तेल में हाइड्रोजन मिलाकर तैयार किया जाता है, ताकि उसे और भी ठोस बनाया जा सके और लम्बे समय तक इस्तेमाल में लाया जा सके.

औद्योगिक रूप से निर्मित ट्रांस फ़ैट आम तौर पर पैकेट में आने वाले खाद्य पदार्थों, पकाई गई सामग्री, खाना पकाने के तेल समेत अन्य वस्तुओं में पाए जाते हैं. और ये हृदय धमनी रोग के कारण हर वर्ष होने वाली पाँच लाख असामयिक मौतों की भी एक वजह हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने 2018 में जारी अपनी एक अपील में, खाद्य वस्तुओं में ट्रांस फ़ैट के इस्तेमाल को पूर्ण रूप से ख़त्म करने का आग्रह किया था, जिसके बाद मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए एक नई रिपोरट जारी की गई है.

2018 से अब तक, 43 देशों ने ट्रांस फ़ैट से निपटने के लिए सर्वोत्तम नीतियाँ लागू की हैं, जिससे लगभग 28 लाख लोगों की रक्षा की गई है, जोकि छह गुना वृद्धि को दर्शाता है.   

मगर, इसके पूर्ण रूप से उन्मूलन के लक्ष्य को फ़िलहाल हासिल नहीं किया जा सका है.

यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “ट्रांस फ़ैट का कोई ज्ञात लाभ नहीं है, और विशाल स्वास्थ्य जोखिम हैं, जिनसे स्वास्थ्य प्रणालियों को भीषण क़ीमत चुकानी पड़ती है.”

“इसके उलट, ट्रांस फ़ैट का उन्मूलन करना किफ़ायती है और इसके स्वास्थ्य के लिए अपार लाभ हैं. सरल शब्दों में, ट्रांस फ़ैट एक ज़हरीला रसायन है जो जान लेता है, और इसका भोजन में कोई स्थान नहीं है.”

“समय आ गया है कि इससे हमेशा के लिए छुटकारा पा लिया जाए.”

प्रयोग पर पाबन्दी

पूर्ण रूप से उन्मूलन की दिशा में सर्वोत्तम नीतियाँ, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्थापित विशिष्ट शर्तों का पालन करती हैं और सभी प्रकार से औद्योगिक रूप से निर्मित ट्रांस फ़ैट को सीमित करने पर बल दिया गया है.

इसके विकल्पों में, सभी भोज्य पदार्थों में कुल वसा की प्रति 100 ग्राम मात्रा में ट्रांस फ़ैट के प्रयोग को केवल दो ग्राम तक सीमित रखना है.

इसके साथ-साथ, खाद्य पदार्थों में आशिंक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल के उत्पादन या इस्तेमाल पर अनिवार्य राष्ट्रीय पाबन्दी लगाना है, जोकि ट्रांस फ़ैट का एक बडा स्रोत है.

अब तक, ट्रांस फ़ैट के कारण हृदय धमनी रोग और उससे होने वाली मौतों के मामलों में सर्वाधिक प्रभावित 16 देशों में से 9 देशों के पास सर्वोत्तम नीतियाँ नहीं हैं.

इनमें ऑस्ट्रेलिया, अज़रबैजान, भूटान, इक्वाडोर, मिस्र, ईरान, नेपाल पाकिस्तान और कोरिया गणराज्य हैं.

अधिकांश मामलों में, सर्वोत्तम नीतियाँ, धनी देशों में लागू की गई है, मुख्यत: अमेरिका और योरोपीय देशों में.

लेकिन संगठन के अनुसार, भारत, पैराग्वे, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, यूक्रेन, फ़िलिपीन्स समेत अन्य मध्य-आय वाले देशों में इन नीतियों को अपनाया जाने लगा है.

इस वर्ष, मैक्सिको, नाइजीरिया और श्रीलंका जैसे देशों ने भी इस वर्ष कार्रवाई के लिए लक्ष्य स्थापित किया है. अब तक किसी भी निम्न-आय वाले देश ने ट्रांस फ़ैट के उन्मूलन के लिए सर्वोत्तम नीति को नहीं अपनाया है.  

रोकथाम सम्भव

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने यह वार्षिक रिपोर्ट एक ग़ैर-सरकारी संगठन, Resolve to Save Lives, के साथ मिलकर तैयार की है, जोकि औद्योगिक रूप से तैयार ट्रांस फ़ैट को राष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति से पूर्ण रूप से हटाने के लिए समर्पित है.

इस वर्ष, स्वास्थ्य संगठन ने देशों से निगरानी व स्वस्थ तेल का इस्तेमाल करने और सर्वोत्तम नीतियाँ अपनाए जाने पर ध्यान केन्द्रित करने का आग्रह किया है.

इसके अतिरिक्त, यूएन एजेंसी द्वारा दिशानिर्देश भी तैयार किए गए हैं, ताकि ट्रांस फ़ैट की चुनौती से निपटने के लिए तेज़ी से क़दम बढ़ा सकें.

इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय खाद्य व पेय पदार्थ गठबन्धन द्वारा लिए गए संकल्पों के अनुरूप, खाद्य निर्माताओं को अपने उत्पादों में औद्योगिक रूप से निर्मित ट्रांस फ़ैट का प्रयोग रोकने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.

तेल और वसा के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं से भी औद्योगिक रूप से निर्मित ट्रांस फ़ैट का उन उत्पादों में प्रयोग हटाने के लिए कहा गया है, जोकि विश्व भर में निर्माताओं को बेचे जाते हैं.

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