उद्योग/व्यापार

अदाणी समूह हवाई अड्डा, डेटा सेंटर से भविष्य में करेगा कमाई

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अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज शुक्रवार को अपना 20,000 करोड़ रुपये का अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) ला रही है। कंपनी इसके जरिये जुटाई जाने वाली रकम अपने ग्रीन एनर्जी कारोबार में निवेश और ऋण चुकाने के लिए इस्तेमाल करेगी।

अदाणी समूह के सीएफओ जुगशिंदर रॉबी सिंह ने देव चटर्जी और कृष्ण कांत से बातचीत में खुदरा निवेशकों की भागीदारी और अगले दशक में बुनियादी ढांचा एवं ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं में 107 अरब डॉलर के निवेश की समूह की योजनाओं के बारे विस्तृत चर्चा की। मुख्य अंश:

शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या कुल आबादी के लिहाज से अभी काफी कम है। आपको क्यों लगता है कि अदाणी एंटरप्राइजेज के निर्गम में खुदरा निवेशक भाग लेंगे?

हम बड़ी देसी कंपनी है, जिसके कारोबार का दायरा काफी व्यापक है। निवेशक भविष्य में हमारी कंपनी के उभरते दमदार कारोबार पर गौर कर सकते हैं। हम कई क्षेत्रों में कारोबार करते हैं जैसे डेटा सेंटर, हवाई अड्डा, उपभोक्ता केंद्रित कारोबार आदि। हवाई अड्डों और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में हम भविष्य में जमकर कमाई करेंगे। जब आप भारत में यात्रा करते हैं तो आप इन परिसंपत्तियों को देख सकते हैं। ये हाइड्रोजन, हवाई अड्डा, डेटा सेंटर जैसी सामने दिखने वाली संपत्तियां हैं और खुदरा निवेशक इनके मालिक बन सकते हैं।

इस एफपीओ के जरिये भारत के लोग इन भारतीय संपत्तियों के स्वामी बनेंगे। संपत्ति सृजन और राष्ट्रीय यानी दोनों नजरियों से यह अहम संदेश है कि हमारे प्रमुख बुनियादी ढांचे के मालिक भारतीय ही हैं। भारतीय परिवारों की संपत्ति फिलहाल करीब 15 लाख करोड़ डॉलर है और शेयरों में कुल निवेश इसके 2 फीसदी से भी कम है। यदि वे निवेश करेंगे तो भविष्य में उन्हें अदाणी एयरपोर्ट्स और डेटा सेंटरों में शेयर स्वत: मिल जाएंगे।

अदाणी समूह ग्रीन एनर्जी, सड़क, बुनियादी ढांचा आदि नई परियोजनाओं में 107 अरब डॉलर के भारी निवेश की योजना बना रहा है। क्या आप विदेश से रकम जुटाएंगे और क्या इनमें से किसी कारोबार को विदेश में सूचीबद्ध कराने की योजना है?

अदाणी एंजरप्राइजेज नए कारोबार विकसित करने के लिए 70 अरब डॉलर का निवेश करेगी और पूरा समूह करीब 107 अरब डॉलर लगाएगा। हमारी कंपनी भारतीय है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत में अधिक पूंजी निर्माण हो। हमें अच्छे प्रशासन, अच्छे प्रतिफल, अच्छी रेटिंग, उचित खुलासे आदि के साथ भारतीय संपत्ति से कमाई का तरीका ढूंढना होगा ताकि निवेशकों का भरोसा बरकरार रहे। हमारा मानना है कि हमारे शेयर भारतीयों के ही पास होने चाहिए। हमें भरोसा है कि हमारी मूल पूंजी भारत से ही आ सकती है। यदि हमें भारत से इक्विटी पूंजी मिलती है तो उसकी तिगुनी रकम ऋण के रूप में मिल जाएगी। इससे देश मे ही बड़े पैमाने पर पूंजी निर्माण हो सकता है।

तीस साल में हमने भारत में व्यापक सुधार देखे हैं। पिछले कुछ साल में मोदी सरकार ने कई सूक्ष्म आर्थिक सुधार और ढांचागत सुधार किए हैं। डिजिटलीकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), जीएसटी आदि काफी सकारात्मक सुधार हैं, जिनसे लोगों को फायदा होगा। हमारे अधिकतर कारोबार विदेश से रकम जुटा सकते हैं। अदाणी ग्रीन अमेरिका के प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग में पहले ही सूचीबद्ध हो चुकी है और हमने इसे आसानी से सूचीबद्ध करा सकते हैं क्योंकि हम प्रशासन एवं खुलासे के विश्वस्तरीय मानक अपनाते हैं। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि पहले भारतीयों के लिए धन सृजन हो। इसलिए हम यहीं सूचीबद्ध रहेंगे और भारतीय कंपनी बने रहेंगे।

सरकार और भी हवाई अड्डों के निजीकरण की योजना बना रही है। क्या अदाणी समूह अगले दौर की नीलामी में भाग लेगा?

सरकार ने अभी आखिरी फैसला नहीं किया है। वह प्रमुख हवाई अड्डों के साथ उन हवाई अड्डों को जोड़ना चाहती है, जो आर्थिक रूप से कारगर नहीं हैं। ऐसे में आप केवल प्रमुख हवाई अड्डे को नहीं खरीद सकेंगे। उदाहरण के लिए आप केवल अमृतसर हवाई अड्डा नहीं खरीद सकेंगे। उसके साथ आपको कोई ऐसा हवाई अड्डा लेना होगा, जिसके चलने की संभावना बहुत कम है। हालांकि इसके लिए प्रक्रिया और समय-सीमा अभी तय नहीं की गई है। सरकार की योजना साफ होने और प्रतिस्पर्द्धा आयोग से मंजूरी मिलने पर हम अपने नेटवर्क का विस्तार करेंगे।

कई कंपनियां अपनी सड़क परिसंपत्तियां बेच रही हैं। क्या आप सड़क परियोजनाओं के अधिग्रहण पर विचार करेंगे?

हम गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना की तरह सड़क परियोजनाओं को शून्य से शुरू करने में दिलचस्पी रखते हैं। बिक रही अधिकतर सड़क परियोजनाएं पहले ही तैयार हो चुकी हैं। इसलिए यदि अधिग्रहण केवल वित्तीय रिटर्न के लिए है तो हमें दिलचस्पी नहीं है। लेकिन अगर किसी परियोजना में हम विकास की अपनी क्षमता इस्तेमाल कर सकते हैं और रिटर्न भी बेहतर हो सकता है तो हम उसे जरूर देखेंगे।

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